पारम्परिक रूप से जौनसार बावर क्षेत्र अपने सुरक्षित और समृद्ध जंगल के क्षेत्र के लिए जाना जाता है। इसके ऊँचे पहाड़ी क्षेत्र में देवदार के वृक्ष, फ़र वृक्ष आदि मौजूद हैं जिनसे अंग्रेज़ों के काल से इमारती लकड़ी मिलती रही है। उस समय पेड़ की लकड़ी ढलान से गिरकर यमुना के रास्ते दिल्ली पहुँचा करती थी।
जौनसार का भौगोलिक विवरण:
सीमाएं: पूर्व में यमुना और पश्चिम में टोंस नदी। उत्तर में उत्तरकाशी जिला और हिमाचल प्रदेश की सीमाएं लगती हैं।
ऊंचाई: यह क्षेत्र ऊँचे पर्वतों (जैसे खरम्बा चोटी - 3084 मीटर) से लेकर घाटी क्षेत्रों में स्थित है, जिसमें बावर का ऊपरी हिस्सा बर्फ से ढका रहता है।
जलवायु: हिमालयी जलवायु, यहाँ कड़ाके की ठंड और मध्यम गर्मी होती है।
मुख्य स्थल: चकराता, कालसी (अशोक के शिलालेख के लिए प्रसिद्ध), लाखामंडल (महाभारत काल से संबंधित) और हनोल (महासु देवता मंदिर) प्रमुख स्थान हैं।
अर्थव्यवस्था: मुख्य रूप से कृषि, जिसमें सीढ़ीदार खेत और नकदी फसलें (आलू, अदरक, टमाटर) शामिल हैं।
संस्कृति: जौनसारी जनजाति का मुख्य निवास, जहाँ महासू देवता की पूजा की जाती है।
यहाँ की सांस्कृतिक पहचान इसे अन्य गढ़वाली क्षेत्रों से अलग करती है।